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मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Thursday, June 18, 2015

THE BRANCHES OF GREAT TANWAR VANSH

THE BRANCHES OF GREAT TANWAR VANSH

Rajputana Soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास



मित्रों तंवर वंश से सम्बंधित पिछली दो पोस्ट में हम तंवर वंश की उत्पत्ति और हल्दीघाटी युद्ध में तोमर राजपूतो की वीरता से अवगत करा चुके हैं.
आज हम आपको तंवर/तोमर वंश की शाखाओं से अवगत करवाएँगे। तंवर वंश को अर्जुनायन वंश भी कहा गया है.इसकी 22 मुख्य शाखाएँ है जो पूरे उत्तर एवं मध्य भारत में फैलीं हुई है। तवंर वंश के मूल पुरुष पांडूपुत्र अर्जुन के पौत्र परीक्षित जी को बताया जाता है। तंवर वंश की 22 प्रमुख शाखाएं इस प्रकार है.....

==========जावला तंवर ===========

जावला या अनंगपाल के वंशज जावला तंवर कहलाए,रुनेचा,असील जी के तंवर,जाटू,सांपला(सिम्पल) आदि इनकी शाखाएँ हैं,सांपला(सिम्पल),रुनेचा जैसलमेर में मिलते हैं,लोकदेवता रामदेव इसी रुनेचा शाखा से थे,

========ग्वालेरा तंवर==============

दिल्ली छूटने के बाद ग्वालियर पर शासन करने के कारण यहाँ के तोमर ग्वालेरा कहलाए

===========जाटू तंवर ==============

जाटू तंवर राजपूत वंश राजा अंगपाल द्वितीय के पौत्र व राजा शालीवाहन तंवर के पुत्र राव जैरथ जी जिन्हे जाटू जी कहा जाता था,के कुटुंब से आगे बढ़ा। राव जाटू के साथ उनके भाई रघु व अंगपाल तंवर प्रथम के पुत्र सतरौला का कुटुंब आज हरयाणा के रोहतक , महेंद्रगढ़ , हिसार, कैथल , कुरुक्षेत्र और खासकर भिवानी में वास करता है। एक समय में इनके राज्य के अधीन लगभग 1440 गाँव थे। आज जाटू तंवरों के चौरासी गाँव भिवानी और आस पास के जिलों में वास करती है। पूर्व जनरल वीके सिंह भी तंवरों की इसी शाखा से है। भिवानी शहर की स्थापना भी इन्ही तंवरों ने की। अब से कुछ समय पहले तक भी सरकारी दस्तावेजों में इस इलाके को तीन टप्पों या टप्पा में बसा हुआ माना व जाना जाता था जो की जाटू, रघु व सतरौला राजाओ की परागनाएँ थी।
इन तीनो तंवरो के वंशजों को अपनी जागीरें बढ़ने के अवसर मिले , जिनमे जाटू के वंशज काफी फैले और उम्र सिंह ने तोशाम का इलाका कब्जे में ले लिया इस कारण इलाका उमरैण टप्पा कहलाया जाने लगा। ऐसे ही भिवानी बछोअन टप्पा कहलाता था। जाटू के सिवानी वाले वंशजों को रईस कहा जाता था और तलवंडी में बसे वंशजों को राणा कहा जाने लगा।


========== जंघारा तंवर ============


जंघारा तंवर तंवरों में सबसे लड़ाकू शाख मानी जाती है। जंघारा शब्द ही जंग व अहारा शब्द को जोड़ कर बना है जिसका अर्थ है जो वंश जंग के लिए भूखा हो। जंघारा तंवरों की वंशावली अंगपाल के पोत्र राव जगपाल से होती है। यह तंवर इन्दौरिया तंवरो के भी भाई है। दिल्ली में चौहानो के कब्जे के बाद जंघारा तंवर तंवरों की मुख्या शाखा से अलग हो रोहिलखण्ड के इलाके की ओर राजकुमार धापू धाम के नेतृत्व में कूच कर गए। जंघारा राजपूतों ने बरेली व आस पास से चौदवीं शताब्दी में ग्वालों अहीरों व कठेरिया राजपूतों को युद्ध में हरा कर बहार निकाला। इन्होने रूहेला पठानों को भी कभी चैन से नहीं बैठने दिया , जंघारा राजपूतो की बहादुरी व लड़ाकूपन को देखते हुए ब्रिटिश काल में इनकी भर्ती सेना में ऊँचे ओहदों पर की जाती थी।


=========पठानिया तंवर============ 

पठानिया तंवर राजा अनंगपाल तंवर के अनुज राजा जैतपाल के वंशज है जिन्होंने उत्तर भारत में धमेरी नाम के राज्य की स्थापना की और पठानकोट नामक शहर बसाया। धमेरी राज्य का नाम बाद में जा कर नूरपुर पड़ा। यह वंश सं 1849 तक विदेशी आक्रमणकारियों के विरुध अपने संघर्षों के लिए जाना जाता है चाहे मुस्लमान हो या अंग्रेज। सं 1849 में नूरपुर अंग्रेजो के अधीन हो गया। इस वंश के राजा राम सिंह पठानिया अंग्रेजों के विरुद्ध अपनी वीरता के लिए विख्यात हैं,यह वंश इतना बहादुर व झुझारू है के आजादी के बाद भी पठानिया राजपूतों ने 3 महावीर चक्र प्राप्त किये। आज पठानिया राजपूत उत्तर पंजाब व हिमाचल में फैले हुए है।


=============जंजुआ वंश ==============

जंजुआ वंश भी तंवर राजपूतों की तरह अर्जुन के वंशज माने जाते है। जंजुआ राजपूतों की उत्पत्ति व नाम अर्जुन के वंशज राजा जनमेजय से मानी जाती है जिनके ऊपर इनके वंश का नाम पड़ा। जंजुआ वंश तंवर वंश के भाई के रूप में देखा जाता है।जंजुआ राजपूतों के राज्य पूर्वी पाकिस्तान के इलाके में रहे है। इस वंश के ऊपर डिटेल्ड पोस्ट आने वाले समय में की जाएगी। ज्यादातर जंजुआ राजपूतों की खाप आज के पाकिस्तान में पायी जाती है जो मुस्लिम बन चुके है। कुछ जंजुआ राजपूतो के गाँव आज भी पंजाब में मौजूद है और वो हिन्दू राजपूत है। जंजुआ एक बहुत ही झुझारू व बहादुर वंश माना जाता है।पाकिस्तान के कई बड़े आर्मी जनरल जंजुआ राजपूत हैं,अंग्रेजो ने भी जंजुआ राजपूतो को पंजाब की सबसे लड़ाकू कौम बताया था.कबूल का प्रसिद्ध शाही वंश भी जंजुआ राजपूत वंश ही माना जाता है,जिन्होंने गजनवी से लम्बे समय तक संघर्ष किया था.यही नहीं इसके वंशज वीर पोरस को भी अपना पूर्वज मानते हैं जिन्होंने सिकन्दर को भी हरा दिया था.


============जर्राल वंश ===============

ये भी तंवर वंश की शाखा हैं,इन्होने तराइन के दोनों युद्धों में प्रथ्विराज चौहान के साथ मिलकर गौरी का मुकाबला किया था,इसके बाद किसी कारणवश इस्लाम स्वीकार कर लिया,मध्य काल में इनका राज्य हरियाणा के कलानौर,जम्मू कश्मीर के राजौरी में था,इन्होने पठानों,सिखों,ब्रिटिशों और डोगरो से खूब लड़ाई लड़ी और कभी भी आसानी से किसी के काबू नहीं आये,आज इनकी आबादी अधिकतर जम्मू कश्मीर,पाकिस्तान में मिलती है,


=================बेरुआर वंश ===============

बेरुआर वंश तंवर वंश की ही एक शाखा है जिसने पूर्वी उत्तरप्रदेश के बलिया व मुज़्ज़फ़्फ़रपुर जिले पर राज किया। भाटों के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेरुर नाम की जन जाती को पराजय कर कर बेरुआरी तंवरों ने राज्य स्थापित किया जिस कारण इनका नाम बेरु + आरी यानि दुश्मन पर पड़ा। बेरुआर वंश के कई गाँव आज बिहार के मिथिलांचल इलाके,फ़ैजाबाद,बलिया,गाजीपुर,बनारस,छपरा आदि जिलो में पाए जाते है,यह वंश पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा पर सबसे शक्तिशाली राजपूत वंशो में एक है.

===========इन्दौरिया / इंदोलिया तंवर =========

इन्दौरिया तंवर सम्राट अनंगपाल तोमर के पुत्र इंदुपाल के वंशज है। इन्दौरिया तंवरों के ठिकाने आज झाँसी दतिया धौलपुर आदि में पाए जाते है। दिल्ली के गौरी द्वारा ध्वस्त हो जाने के बाद यह शाख भी इन इलाकों में आ बसी।

============= इन्दा तंवर ============

यह खाप आज के मध्य प्रदेश के ग्वालियर के आस पास के इलाके में बसी हुई है। इस खाप को लडूवा तंवर भी कहते है।

=========बिलदारिया तंवर ============

राजा बंसोली के वंशज भागपाल ने बीदासर में राज्य स्थापित किया। बीदासर से जो तंवर निकले वे तंवर बिलदारिया कहलाये। इनके गाँव उत्तर प्रदेश के कानपूर बलिया उन्नाव आदि जिलों में है।

===========खाती तंवर ===========

यह तंवर गढ़वाल के खात्मस्यु के अधिकारी थे। इससे पहले इनका निकास आगरा मुरेना के तोमरधार से माना गया है। आज यह शाख गढ़वाल में बस्ती है।

=============सतरावला तंवर========= 

अंगपाल के पुत्र सतरौल के वंशज। भिवानी हरियाणा के आस पास रहते है।

===============सोम वंश ============

सम्राट अनंगपाल उर्फ़ जावल के पुत्र सोम के वंशज। इन्हे सुमाल भी कहा जाता है। कुछ लोग इन्हें पांडू पुत्र भीम का वंश भी मानते हैं ।ईस्ट यूपी के सोमवंशी राजपूत इनसे अलग हैं। सुमाल आज भी दिल्ली के रिठाला गाँव के मूल निवासी है। सुमाल रिठाला के आस पास के गाँवो के अलावा उत्तर प्रदेश के मुज़्ज़फरनगर व मेरठ के 24 गाँवो में पाए जाते है यहाँ इन्हे सोम कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के मशहूर भाजपा नेता संगीत सोम इसी वंश से है।


============= कोड्यां तंवर============= 

जावाल के पुत्र पर ही इस खाप का नाम पड़ा। आज राजस्थान के सीकर जिले में डाबला के आस पास इनके गाँव पड़ते है।

===============निहाल तंवर ============

ये भी दिल्ली पति अनंगपाल उर्फ़ जावल के वंश से है आज मध्यप्रदेश में पाए जाते है।

==============सेलेरिया तंवर ==========


ये भी दिल्ली पति जावल के वंश से है। इन्हे सुनियार भी कहा जाता है ये मध्य प्रदेश के विदिशा में बस्ते है।

===============घोड़ेवा तंवर ===========


नूरपुर हिमाचल के तंवर घोड़ेवा शाशक कहलाए।

===========तिलोता तंवर =========


बिहार के आरा शाहबाद भोजपुर और यूपी के झाँसी जालौन जिले में निवास करते है।

===============जनवार राजपूत ============ 


उत्तर प्रदेश के बलरामपुर गंगवाल ऑइल प्रयागपुर इनके ठिकाने है। जनवार राजपूत झाँसी दतिया और बुंदेलखंड में भी पाए जाते है. जनवार तंवरों की शाखा के बजाये भाई बंध माने जाते है जो राजा तुंगपाल से पहले इस वंश से अलग हो गए।

================कटियार तंवर =========


धर्मपुर राज्य जिला हरदोई उत्तर प्रदेश कटियार तंवर राजपूतों का है।

==============पालीवार तंवर ============


उत्तरप्रदेश के गोरखपुर व फैज़ाबाद जिलो में इनके गाँव है।

================द्वार तंवर ============


यु पी के जालौन झाँसी व हमीरपुर जिलों में पाए जाते है

======जरोलिया तंवर ====

यु पी के बुलंद शहर के आस पास के तंवर जरोलिया कह लाते है।कुछ जगह इन्हें गौड़ वंश की शाखा भी लिखा है

=============रघु तंवर ===============


रघु तंवर जाटू तंवर के भाई माने जाते है और भिवानी के आस पास आज बसे हुए है।

==============अन्य तंवर शाखाये :=============


रैक्वाल तिलोता किसनातिल चंदेरिया रिटालिया मोहाल जोधाण अनवार बिलोड़िया अंगडिया मगरोठिया पन्ना बोधयाणा कोढयाना बेबत भैपा तुनिहान आदि '.

=========मराठा क्षत्रियों में तंवर वंश =========


मराठा तंवर मराठा तौर ठाकुर नाम से जाना जाता है.तौर ठाकुर के मराठवाडा प्रांत मे गोदावरी नदी के तीर पर २२ गाँव है.इस प्रांत को गंगथडी भी कहा जाता है,इसके अलावा मराठो में तावडे या तान्वरे,शिर्के भी तंवर वंशी हैं.


Major Branches of Tanwar Rajputs and Their Brief Background


Jatu Rajputs
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These are descendents of Thakur Jatu singh and now inhabit surrounding villages of Bhiwani (Haryana). The Jatus ruled more than 1440 villages once in the region which is now from Rohtak to Hisar.The three brothers Jatu, Raghu, and Sutraola divided amongst themselves the Parganah of Hansi', each share was called a Tappa and the names Tappa Jatu, Tappa Raghu and Tappa Sutraola were for years used in the Government Records which divisions are well known to this day.
The descendants of the three brothers went on as opportunity afforded adding to their possessions. Those of Jatu's were the most extensive. Umr Singh of the family took Tosham hence that Ilaqua (Area) was known as Umrain tappa. Similarly Bhiwani was called Bachoan tappa after Bacho who had taken possession of it.
Jatu's descendants at Sewani were called Raes, those at Tulwundi were called Ranas hence the village is still called and recorded as Tulwundi Rana, while those at Kulheri called Chowdris and Pica still retain these titles.

Janghára Rajputs
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Known as a large and turbulent branch of the Tomara Rajput clan, the Janghara Rajputs were readily recruited by the British Indian Army.
The turbulent nature of the tribe is further enhanced by the origin of the name Janghara being derived from the words, Jang (war) and Ahára (hunger) meaning "the men who hunger for war".
After the fall of Delhi to the Chauhans, the Janghara sept parted from the main Tomar branch in disgust. They entered Rohilkhund under the leadership of the prince Dhápu Dhám whose warlike nature was proverbial. A couplet sung by women of the clan states
"Neeche Darti upar Ram, beech mein lade Dhapu Dham"
meaning "Below is Earth, above is Lord Rám. Between the two, fights Dhápu Dhám"
The Janghara Rajputs of Bareilly claim to have ejected the Gwálas in 1388CE. in 1405CE they expelled the Ahirs from their Kingdoms. The Katehriya Rajputs were also defeated and exiled from Rohilkhund by the Janghara Rais .
The Jangháras have always been turbulent and warlike; they should furnish the (British Indian) army with some excellent recruits.

Jarral Rajputs
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Originally a branch of Tomar Rajputs, they gained prominence after their conversion to Islam in the 12th century. They are descendants of Pandavas through Raja Naka, younger brother of King Janmejaya and ruled a certain territory of Northern India from a place later came to be known as Kalanaur. They fought against Muhammad Ghor in both the battles of 1191 and 1192 joining Prithviraja Chauhan of Ajmer. They were ferocious and battle hardy Rajputs. Even after conversion they were fond of battles and seized Rajauri from the Pal rulers in 1193 AD.
Jarrals enjoyed fighting the Afghans, the Sikhs, the Dogras and the British and never rested but expanded their state in great length and width of the Punjab Hills. They were ousted from Rajauri State by the combined forces of Sikhs, Dogras and British in 1846. Later, knowing their feats of bravery and courage, the British befriended with them that helped them great in the latter years. It is one of the highest castes of Tomar but due to conversion to Islam they were not mentioned by the Sagas who note, maintain and narrate rajput family trees. They reside in India, Jammu, Kashmir, Punjab and other parts now in Pakistan. The descendents of Jarral Rulers reside in Musaman Burj, Wazirabad in Pakistan.


Pathania Rajputs
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Descendants of Rana Jethpal, younger brother of Anangpal the last of the Tomara kings of Delhi. Established his kingdom at Paithan, now called Pathankot. Their kingdom was called Dhameri which was later renamed Nurpur. Famous for their resistance against foreign rule, which they proved by giving battle to invaders till 1849 A.D., after which the Kingdom was annexed by the British, the Raja being a minor. This clan has to its credit three Mahavir Chakra winners in the Indian Army.This clan has also won many other gallantry awards while serving in the British army of India.


Janjua Rajputs
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The Janjua Rajput clan claim descendancy from the Pandava dynasty through the Pandav Prince Arjun. Prince Arjun, known as the Achilles of India, was famous for his valour. He was eulogised in the Mahabharata epic as the perfect Kshatriya warrior. He conquered many powerful kingdoms in the Mahabharata epic and was the main lead in the battle field of Kurukshetra. Arjun's great grandson, Maharaja Janamejaya, is an apical ancestor of the Janjuas. Janamejaya was later the ruling Emperor of the Kingdom of Hastinapur, the capital of which was Indraprasta (modern day Delhi). Regarding the Janjuas descent from the Pandavas dynasty, the Baliand Bhimwal generals of Raja Dhrupet Dev of Mathura, recorded that the Janjua Raja Dhrupet Dev was the descendant of Emperor Janamejaya of the Pandava dynasty of Prince Arjun.Sir Lepel H Griffin K.C.S.I. had also recorded in the early 1900s that the Janjua were Pandavas in origin.


Beruar rajput
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Beruari/Beruar/Birwar is one of the most dominating rajput subcastes of eastern UP. According to local sources, area of present days Balia and Mirzapur district was once governed by Sudras of Berua caste. A tomar prince defeated them and established the rule of dharma. He and his decedents later called as Berua+ari (Beruari), i.e., enemy of Beruas. There are many villages of this clan in Mithilanchal (Bihar) also. Hati is one of the prominent village of this clan. They are being treated as Amnekh (Superior) rajput clan in Bihar.There is also a prominet village in the district of saran now chapra Nawada near about 1000 families of Beruars are residing there.


Other Sub Branches: Birwar, Badwar, Katiyar, Jinwar, Indoria Kshatriya and Tirota Kshatriya. Indoria Kshatriya has branches - Raikwar, Jaiswar/Jaswar.
Other Tomar Sub Branches
Birwar, Badwar, Borahan,Chanket,suryan, Barnwal, Katiyar, Kallia, Borahan, Bajpanna, Jinwar, Jerah, Jasraiya, Indoria, Jarrota and Tirota Kshatriya. Indoria Kshatriya has branches - Raikwar, Jaiswar/Jaswar.The Tomars of Torawati-Patan in Rajasthan have 3 subdivisions - Asoji(Asal Singhji), Udoji(Uday Singhji) and Kelorji (Kewalramji).

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