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मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Tuesday, June 9, 2015

THE OLDEST RULING DYNASTY OF THE WORLD - KATOCH RAJPUTS

KATOCH RAJPUTS

(The Oldest Ruling Dynasty of the World)



THE GREAT KATOCH VANSHA
(The English Translation of this whole article is available after Hindi section)


====कटोच वंश के गोत्र,कुलदेवी आदि=====

  • गोत्र-अत्री
  • ऋषि- कश्यप 
  • देवी-  ज्वालामुखी देवी
  • वंश-  चन्द्रवंश,भुमिवंश 
  • गद्दी एवं राज्य-  मुल्तान,जालन्धर,नगरकोट,कांगड़ा,गुलेर,जसवान,सीबा,दातारपुर,लम्बा आदि 
  • शाखाएँ-   जसवाल,गुलेरिया,सबैया,डढवाल,धलोच आदि 
  • उपाधि-  मिया 
  • वर्तमान निवास-  हिमाचल प्रदेश,जम्मू कश्मीर,पंजाब आदि 

=== कटोच वंश का परिचय ===

सेपेल ग्रिफिन के अनुसार कटोच राजपूत वंश विश्व का सबसे पुराना राजवंश है। कटोच चंद्रवंशी क्षत्रिय माने जाते है। कटोच राजघराना एवं राजपूत वंश महाभारत काल से भी पहले से उत्तर भारत के हिमाचल व पंजाब के इलाके में राज कर रहा है। महाभारत काल में कटोच राज्य को त्रिगर्त राज्य के नाम से जाना जाता था और आज के कटोच राजवंशी त्रिगर्त राजवंश के ही उत्तराधिकारी है।कल्हण कि राजतरंगनी में त्रिगर्त राज्य का जिक्र है,कल्हण के अनुसार कटोच वंश के राजा इन्दुचंद कि दो राजकुमारियों का विवाह कश्मीर के राजा अनन्तदेव(१०३०-१०४०)के साथ हुआ था,

पृथ्वीराज रासो में इस वंश का नाम कारटपाल मिलता है,
अबुल फजल ने भी नगरकोट राज्य,कांगड़ा दुर्ग एवं ज्वालामुखी मन्दिर का जिक्र किया है,
यूरोपियन यात्री विलियम फिंच ने 1611 में अपनी यात्रा में कांगड़ा का जिक्र किया था,डा व्युलर लिखता है की कांगड़ा राज्य का एक नाम सुशर्मापुर था जो कटोच वंश को प्राचीन त्रिगर्त वंश के शासक सुशर्माचन्द का वंशज सिद्ध करता है,
त्रिगर्त राज्य की सीमाएँ एक समय पूर्वी पाकिस्तान से लेकर उत्तर में लद्दाख तथा पूरे हिमाचल प्रदेश में फैलि हुईं थी। त्रिगर्त राज्य का जिक्र रामायण एवं महाभारत में भी भली भांति मिलता है। कटोच राजा सुशर्माचन्द्र ने दुर्योधन का साथ देते हुए पांडवों के विरुद्ध युद्ध लड़ा था। सुशर्माचन्द्र का अर्जुन से युद्ध का जिक्र भी महाभारत में मिलता है। त्रिगर्त राज्य की मत्स्य और विराट राज्य के साथ शत्रुता का जिक्र महाभारत में उल्लेखित है।
कटोच वंश का जिक्र सिकंदर के युद्ध रिकार्ड्स में भी जाता है। इस वंश ने सिकंदर के भारत पर आक्रमण के समय उससे युद्ध छेड़ा और काँगड़ा राज्य को बचाने में सक्षम रहे। 
ब्रह्म पूराण के अनुसार कटोच वंश के मूल पुरुष राजा भूमि चन्द्र माने जाते है,इस कारण इस वंश को भुमिवंश भी कहा जाता है.इन्होने जालन्धर असुर को नष्ट किया था जिस कारण देवी ने प्रसन्न होकर इन्हें जालन्धर असुर का राज्य त्रिगर्त राज्य दिया था,इस वंश का राज्य पहले मुल्तान में था,बाद में जालन्धर में इनका शासन हुआ,जालन्धर और त्रिगर्त पर्यायवाची शब्द है
भुमिचंद ने सन ४३०० ईसा पूर्व में कटोच वंश एवं त्रिगर्त राज्य की स्थापना की। यह वंश कितना पुराना इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है के महाभारत कल के राजा सुशर्माचंद राजा भूमिचन्द्र के २३४ वीं पीढ़ी में पैदा हुए।
इस प्राचीन चंद्रवंशी राजवंश ने सदियों से विदेशी,देशी हमलावरों का वीरतापूर्वक सामना किया है,
हिमाचल प्रदेश का मसहूर काँगड़ा किला भी कटोच वंश के क्षत्रियों की धरोहर है। कटोच वंश के बारे में काँगड़ा किले में बने महाराजा संसारचन्द्र संग्रहालय से बहूत कुछ जाना जा सकता है।


==== कटोच वंश के वर्तमान टिकाई मुखिया और राजपरिवार ====

राजा श्री आदित्य देव चन्द्र कटोच , कटोच वंश के ४८८ वे राजा और काँगड़ा राजपरिवार के मुखिया एवं लम्बा गाँव के जागीरदार है। यह पदवी इन्हे सं १९८८ से प्राप्त है। ४ दिसंबर १९६८ में इनकी शादी जोधपुर राजघराने की चंद्रेश कुमारी से हुई। इनके पुत्र टिक्का ऐश्वर्या चन्द्र कटोच कटोच वंश के भावी मुखिया है।
काँगड़ा राजघराने ने सन १८०० के आस पास से ही अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का युद्ध छेड़ दिया था। संघर्ष काफी समय तक चला जिसमे इस परिवार को काँगड़ा गंवाना पड़ा। आख़िरकार सं १८१० में दोनों पक्षों के बीच संधि हुई और काँगड़ा राजपरिवार को लम्बा गांव की जागीर मिली। तत्पश्चात काँगड़ा राजपरिवार और कटोच राजपूतो के राजगद्दी लम्बा गॉव के जागीरदार के मानी जाती है।

=== कटोच वंश की शाखाएँ === 


कटोच वंश की चार मुख्य शाखाएँ है :

1. जसवाल : ११७० ईस्वीं में जसवान का राज्य स्थापित होने के बाद यह शाख अलग हुई। 
2. गुलेरिया : १४०५ ईस्वीं में कटोचों के गुलेर राज्य स्थापित होने के बाद कटोच से यह शाखा अलग हुई। 
3. सबैया : १४५० ईस्वी के दौरान गुलेर से सिबा राज्य अलग होने के बाद सिबा के गुलेर सबैया कटोच कहलाए।
4. डढ़वाल : १५५० में इस शाखा ने दातारपुर राज्य की स्थापना की, इस शाखा का नाम डढा नामक स्थान पर बसावट के कारन पड़ा। 

कटोच वंश की अन्य शाखाए धलोच,गागलिया,गदोहिया,जडोत,गदोहिया आदि भी है।

==== कटोच वंश की संछिप्त वंशावली और तत्कालीन समय का जुड़ा हुआ इतिहास ====


C. 7800 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख 
राजनका (राजपूत का प्रयायवाची शब्द) भूमि चन्द्र से इस वंश की शुरुआत हुई।जिन्होंने त्रिगर्त राज्य जालन्धर असुर को मारकर प्राप्त किया,मुल्तान(मूलस्थान)इन्ही का राज्य था.
C. 7800 - 4000 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख
त्रिगर्त राजवंश यानी मूल कटोच वंशियों ने श्री राम के खिलाफ युद्ध लड़ा(रामायण में उल्लेखित)
C. 4000 - 1500 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख
त्रिगता नरेश शुशर्माचंद ने काँगड़ा किले की स्थापना की और पांडवों के खिलाफ युद्ध लड़ा। 
( महाभारत में उल्लेखित)

C. 900 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख
कटोच राजाओं ने ईरानी व असीरिआई आक्रमणकारियों के खिलाफ युद्ध लड़ा और पंजाब की रक्षा की।

C. 500 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख
राजनका परमानन्द चन्द्र ने सिकंदर के खिलाफ युद्ध लड़ा।

C. 275 ईसा पूर्व के दौरान कटोच वंश का उल्लेख
कटोच राजाओं ने अशोक महान के खिलाफ युद्ध लड़े और मुल्तान हार गए।

C. 100 AD
काँगड़ा राजघराने ने कन्नौज के खिलाफ बहुत सारे युद्ध लड़े।

C. 470 AD
काँगड़ा के राजाओं ने हिमालय पर प्रभुत्व ज़माने के लिए कश्मीर के राजाओं के साथ कई युद्ध किए।

C. 643 AD
Hsuan Tsang ने कांगड़ा राज्य का दौरा किया उस समय इस राज्य को जालंधर के नाम से जाना जाने लगा था।

C. 853 AD
राजनका पृथ्वी चन्द्र का राज्य अभिषेक हुआ।

C. 1009 AD
महमूद ग़ज़नी ने सन 1009 में काँगड़ा(भीमनगर)पर आक्रमण किया।इस हमले के समय जगदीशचन्द्र यहाँ के राजा थे,

C. 1170 AD
काँगड़ा राज्य जस्वान और काँगड़ा दो भागों में विभाजित हुआ। राजा पूरब चन्द्र कटोच से जस्वान राज्य पर गद्दी जमाई और कटोच वंश में जसवाल शाखा की शुरुआत हुई। कटोच और मुहम्मद घोरी के बीच में युद्ध छिड़ा जिसमे(१२२० AD) कटोच जालंधर हार गए।

C. 1341 AD
राजनका रुपचंद्र की अगुवाई में कटोचों के दिल्ली तक के इलाके पर हमला किया और लूटा। तुग़लक़ों ने डर और सम्मान में इन्हे मियां की उपाधि दी। कटोचों ने तैमूर के खिलाफ भी युद्ध लड़ा।

C. 1405 AD
काँगड़ा राज्य फिर से दो भागों में बटा और गुलेर राज्य की स्थापना हुई। गुलेर राज्य के कटोच आज के गुलेरिआ राजपूत कहलाए।

C.1450 AD
गुलेर राज्य भी दो भागों में बट गया और नए सिबा राज्य की स्थापना हुई। सिबा राज्य के कटोच सिबिया राजपूत कहलाए।

C. 1526 - 1556 AD
शेरशाह सूरी ने हमला किया पर उसकी पराजय हुई। उसके बाद अकबर ने काँगड़ा पर हमला किया जिसमे कटोच वंश कि हार हुई,कटोच राजा ने अकबर को संधि का न्योता भेजा जिसे अकबर ने स्वीकारा। बाद में मुग़लों ने काँगड़ा किले पर ५२ बार हमला किया पर हर बार उन्हें मूह की खानी पड़ी।इसके बाद जहाँगीर ने भी हमला किया,

C. 1620 AD
जहांगीर और शाहजहाँ के समय मुग़लों का काँगड़ा किले पर कब्ज़ा हुआ।

C. 1700 AD
महाराजा भीम चन्द्र ने ओरंगजेब कि हिन्दू विरोधी नीतियों के कारण गुरु गोविन्द सिंह जी के साथ औरंगज़ेब के खिलाफ युद्ध किया। गुरु गोविन्द सिंह जी ने उन्हें धरम रक्षक की उपाधि दी।पंजाब में आज भी इनकी बहादुरी के गीत गाये जाते हैं.

C. 1750 AD
महाराजा घमंडचन्द्र को अहमदशाह अब्दाली द्वारा जालंधर और ११ पहाड़ी राज्यों का निज़ाम बनाया गया।

C. 1775 AD to C. 1820 AD
काँगड़ा राज्य के लिए यह स्वर्णिम युग कहा जाता है। राजा संसारचन्द्र द्वितीय की छत्र छाँव में राज्य खुशहाली से भरा।

C. 1820 AD
काँगड़ा राज्य के पतन का समय :गोरखों ने कांगड़ा राज्य पर हमला किया,राजा संसारचंद ने सिख राजा रणजीत सिंह से मदद मांगी मगर मदद के बदले महाराजा रणजीत सिंह की सिख सेना ने काँगड़ा और सीबा के किलों पर कब्ज़ा कर लिया। सीबा का किला राजा राम सिंह ने सिखों की सेना को हरा कर दुबारा जीत लिया। सिखों के दुर्व्यवहार ने महाराजा संसारचंद को बहुत आहत किया..

* 1820 - 1846 AD
सिखों ने काँगड़ा को अंग्रेजो ( ईस्ट इंडिया कंपनी को) सौंप दिया। कटोच राजाओ ने कांगड़ा की आजादी की जंग छेडी। यह आजादी के लिए प्रथम युद्धों और संघर्षों में से था। राजा प्रमोद चन्द्र के नेतृत्व में लड़ी गयी यह जंग कटोच हार गए। राजा प्रमोद चन्द्र को अल्मोड़ा जेल में बंधी बना कर रखा गया। वहां उनकी मृत्यु हो गई।

*1924 AD
महाराजा जय चन्द्र काँगड़ा- लम्बा गाँव को महराजा की उपाधि से नवाजा गया और ११ बंदूकों की सलामी उन्हें दी जाने लगी।

*1947 AD
महाराजा ध्रुव देव चन्द्र ने काँगड़ा को भारत में मिलाने की अनुमति दी।



=====कांगड़ा का किला======

कांगड़ा का दुर्ग स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है,ये दुर्ग इतना विशाल और मजबूत था की इसे देवकृत माना जाता था,इसे नगरकोट अथवा भीमनगर का दुर्ग भी कहा जाता था,कटोच राजवंश के पूर्वज सुशर्माचंद द्वारा निर्मित इस दुर्ग पर पहला हमला महमूद गजनवी ने किया,इसके बाद गौरी,तैमूर,शेरशाह सूरी,अकबर,शाहजहाँ,गोरखों,सिखों ने भी हमला किया,सदियों तक यह महान दुर्ग अपने ऐश्वर्य,आक्रमण,विनाश के बीच झूलता रहा,यह दुर्ग प्राचीन चन्द्रवंशी कटोच राजपूतों के गौरवशाली इतिहास कि गवाही देता है,
कांगड़ा का अजेय दुर्ग जिसे दुश्मन कि तोपें भी न तोड़ सकी वो सन 1905 में आये भयानक भूकम्प में धराशाई हो गया,मगर इसके खंडर आज भी चंद्रवंशी कटोच राजवंश के गौरवशाली अतीत कि याद दिलाते हैं.

Katoch Rajput Dynasty : Article in English


Katoch is the name of a Rajput clan belonging to the chandravanshi Kshatriya lineage. Their traditional areas of residence was Trigarta Kingdom, Jalandhar, Multan i.e. the areas of residence are mainly in the Indian states of Punjab,Punjab hills (Himachal Pradesh). Katoch Dynasty is an offshoot of Trigratraje Dynasty.
The Katoch dynasty is considered to be the oldest surviving royal dynasty in the world.They first find mention in the Hindu epics Ramayana and Mahabharata and the second mention is in the recorded history of Alexander the Great's war records. One of the Indian kings who in the time of Alexander ruled the area near Kangra is said to be a Katoch king. In Mahabharata they are referred to as Trigarta who fought Arjuna. Raja Susarma Chandra fought Pandava Arjuna. He was an ally of Duryodhana and sworn enemy of the Virat and Matsya Kingdoms.The katoch's were also known for their sword skills.
In past centuries, they ruled several princely states in the region. The originator of the clan was Rajanaka Bhumi Chand. Their famous Maharaja Sansar Chand II was a great ruler. The ruler Rajanaka Bhumi Chand Katoch founded the Jwalaji Temple in Himachal Pradesh.
The history of the Katoch Dynasty has been showcased at the Maharaja Sansar Chand Museum adjoining the Kangra Fort. The Museum provides audio guides for the fort and the museum.The Maharaja Sansar Chandra Museum was officially inaugurated by His Holiness the Dalai Lama on the 6th of April 2011.

===========Present Head State and Clan Head===============



The head of royal family of Kangra is considered as the head of Katoch dynasty. After the fall of Kangra to the Britishers (East India Company) in 1820's ,the royal family was granted a jagir of 20 villages at Lambagraon. Therefrom, the head of house at Lambagraon is considered as the head of Katoch dynasty.
Raja Shri ADITYA DEV CHAND KATOCH, 488th and present Raja of his line, Head of the Royal House of Kangra, Jagirdar of Lambagraon, Rajgir and Mahal Moria since 1988 (Clouds End Villa, Dharamsala, District Kangra, Himachal Pradesh, India) educated at the Doon School, Dehra Dun; married 4th December 1968, Rani Shrimati Chandresh Kumari, daughter of HH Raj Rajeshwar Maharajadhiraj Maharaja Shri Hanwant Singhji Sahib Bahadur of Jodhpur, and his wife, HH Maharani Krishna Kumari Ba Sahiba, and has issue.
Tikka Aishwariya Chand Katoch, born 16th January 1970, married about 1997, Tikkarani Shailaja Kumari, daughter of HH Raja Vikram Singhji of Sailana, and his wife, HH Rani Chandra Kumari, and has issue.
Natiraj Ambikeshwar Dev Chand Katoch, born 22nd December 1998.


==========Chronology of the Katoch dynasty and Periodical Brief History===========


C. 7800 BC
Rajanaka Bhumi Chand founded the Katoch Dynasty
C. Description of this Dynasty found between the reign 7800 BC - 4000 BC
The Rajas of Kangra fought against the Hindu deity lord Rama
C. Description of this Dynasty found between the reign 4000 BC - 1500 BC
Raja sushurma chand built the fort of Kangra and fought against pandavas in epic mahabharta
C. 900 BC
The Katoch kings fought the Persian and Assyrian attacks on Punjab
C. 500 BC to
Rajanaka Paramanand Chandra, fought Alexander the Great
C. 275 BC
The Katoch Rajas fought Ashoka the Great and lost their lands in Multan
C. 100 AD
The Rajas of Kangra fought numerous battles against the Rajas of Kannauj
C. 470 AD
The Rajas of Kangra fought the Rajas of Kashmir for the supremacy in the hills
C. 643 AD
Hsuan Tsang visited the Kingdom of Kangra (then known as "Jallandhra")
C. 853 AD
Rajanaka Prithvi Chandra's reign
C. 1009 AD
Mahmud of Ghazni invades Kangra
C. 1170 AD
Kingdom of Kangra is divided into two parts, Kangra and Jaswan
The Katoch armies fight against Muhammad of Ghor (the lands of Jalandhar were lost c. 1220 AD)
C. 1341 AD
Rajanaka Rup Chandra's looting expeditions take him till the gates of Delhi
The Katoch kings fight Taimur
Tughlaqs grant the title of Mian to the Katoch Royal Family
C. 1405 AD
Further division of the Kangra State; state of Guler is founded
C.1450 AD
Further Guler State is also divided and a new State namely Siba is founded.
C. 1526 - 1556 AD
Sikandar Shah Suri and the Rajas of Kangra combine their forces against Akbar but are defeated
The Raja of Kangra renders his alliance to Emperor Akbar and in return in given the title of Maharaja
Later, the Mughals attack the Kangra Fort 52 times but fail to capture it.
C. 1620 AD
Mughals occupy the fort of Kangra
C. 1700 AD
Maharaja Bhim Chandra unites with Guru Gobind Singh against Aurangzeb
He receives the title of Dharam Rakshak from the Guru
C. 1750 AD
Maharaja Ghamand Chandra is made the (first ever Rajput) Nizam of Jalandhar by the Durranis
C. 1775 AD to C. 1820 AD
The golden age of Kangra under Raja Sansar Chand-II
Kangra miniature painting flourishes under him
C. 1820 AD
Decline of the Kangra state
Kangra Fort occupied by the Sikhs after a war but the Fort of Siba was re-captured by Raja Ram Singh after defeated the army of Maharaja Ranjit Singh.
Later Katoch Kings re-captured Kangra Fort after defeated Sikh Armies.
1846 AD
The Sikhs cede Kangra to the HEIC
The Katoch kings fight for their independence against the British. Raja Pramod Chand loses the battle and is taken prisoner to Almoda – he dies there
1924 AD
Maharaja Jai Chandra of Kangra-Lambagraon is granted the title of "Maharaja" as a hereditary distinction, and a salute of 11 guns as a personal honour.
1947 AD
Maharaja Dhruv Dev Chandra (last ruler of Kangra-Lambagraon) merges his estate with the Dominion of India, when India gains Independence
1972 AD
The Princely Order is abolished in India and the Rajas of Kangra-Lambagraon become ordinary citizens. The current head of the Katoch Clan is Maharaja Aditya Katoch. His wife Rani Chandresh Kumari was the Union Minister of Culture for India in 2014.
The district of Kangra is merged with the newly founded state of Himachal Pradesh.Siba State is simply incorporated in India.

Raja Ram Singh of Sibaia clan defeated the army of Maharaja Ranjit Singh and re-captured the fort of Siba State. The British attempts to conquer the Siba State were thwarted by Sunder Singh (Raja Sahib), brother of Raja Ram Singh. Sunder Singh also established Tantpalan domense. Tantpalan domense, presently, falls in District:Hoshiarpur(Punjab)

=====Branches of Katoch Dynasty==========


Jaswal - Raja Naginder Singh is the present head of Jaswal Clan
Guleria - Raja Brijesh Chand Guleria is the present head of Guleria Clan
Sibaia - Raja Dr.Ashok K.Thakur is the present head of Sibaia Clan
Dadhwal - Kanwar Deepak singh is the present head of Dadwal Clan
Dhaloch - Pratap singh Dhaloch is the present head of Dhaloch

=====References======

* H.A. Rose, A glossary of the tribes and castes of the Punjab and North-West India, Volume 1, page 263
*Mark Brentnall, The Princely and Noble Families of the Former Indian Empire: Himachal Pradesh, page 312
* Dharam Prakash Gupta, "Seminar on Katoch dynasty trail". Himachal Plus. On line.
* Mark Brentnall, The Princely and Noble Families of the Former Indian Empire: Himachal Pradesh, page 312
* A beautiful article from famous Rajput and Military Historian Airavat Singh ji
http://kshatriyawiki.com/wiki/Katoch
*राजपूत शाखाओं का इतिहास पृष्ठ संख्या 292 से 299 देवी सिंह मंडावा
*क्षत्रिय राजवंश पृष्ठ संख्या 359 रघुनाथ सिंह कालीपहाड़ी
*राजपूत वंशावली पृष्ठ संख्या 35,183 ईश्वर सिंह मुंडाढ

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