Featured Post

मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Sunday, August 16, 2015

यदुवंशी क्षत्रिय राजपूत(THE REAL YADAV)

यदुवंशी क्षत्रिय राजपूत(THE REAL YADAV)---------

कृपया इस पोस्ट को पूरा पढ़े और अधिक से अधिक शेयर करें,अगर कोई असहमति अथवा नवीन जानकारी हो तो कमेंट के माध्यम से सभ्य शब्दों में जरुर अवगत कराएं,आपका स्वागत है......
आज हम आपको सच्चे यदुवंशी क्षत्रिय राजपूतो और आजकल छदम यादव उपनाम लिखने वालो के बारे में सटीक जानकारी देंगे।
जब जब धर्म की हानि होती है अधर्म का जोर बढ़ता है तो भगवान नारायण क्षत्रिय वर्ण में अवतार लेकर आतताइयों का संहार करते हैं.क्षत्रियों में सुर्यवंश की रघुवंश शाखा में भगवान श्री राम के रूप में और चन्द्रवंश की यदुवंशी शाखा में योगिराज श्री कृष्ण के रूप में नारायण ने अवतार लिया..........
श्रीकृष्ण अवतार पूर्ण अवतार माना जाता है.श्री कृष्ण ने कंस जैसे अत्याचारी का वध किया और महाभारत के युद्ध में पांड्वो का पक्ष लेकर धर्मयुद्ध में सहायक बने.
श्री कृष्ण के जीवनकाल में ही गांधारी के श्राप से यदुवंश में गृह युद्ध हुआ जिससे यदुवंश का विनाश हो गया.....

श्रीकृष्ण का बाल्यकाल में लालन पालन नन्दबाबा के यहाँ हुआ था,नन्दबाबा गोकुल में अहीरो से कर वसूलने का कार्य करते थे,जबकि श्री कृष्ण यदुवंशी क्षत्रिय थे.....
पर पिछले सौ सालो से सभी अहीरों ने भगवान् श्री कृष्ण से जोड़कर खुद को यादव लिखना शुरू कर दिया है.....पर ये एक ऐसा झूठ है जिसने सच का रूप धारण कर लिया है,
जबकि महाभारत के मुसल पर्व में साफ़ लिखा है कि जब अर्जुन बचे हुए यदुवंशी स्त्री बच्चो को द्वारिका से वापस लेकर आ रहे थे तो मार्ग में उन्हें अभिरो अहीरों ने लूट लिया था।
तभी कहा गया कि

" समय होत बलवान,अभीरन लूटी गोपिका वही अर्जुन ,वही बाण!"।
जिन्होंने यदुवंशी स्त्रियों बच्चो को असहाय स्थिति में लूट लिया था विडम्बना देखिये आज वही अहीर यादव उपनाम लिखने लगे और असली यदुवंशी राजपूतो ने भाटी ,जादौन,जडेजा आदि नये उपनाम धारण कर लिए।

19 वी सदी तक भी अहीर खुद को यादव नही मानते थे।रेवाड़ी के यदुवंशी अहीर खुद को राजपूत ही मानते थे जो पितृ पक्ष की और से यदुवंशी राजपूत थे। पर लगभग सन1920 में अहिरो की सभा हुई जिसके बाद ग्वाल ,गोप,अहर,घोसी,कमरिया अहिरो ने अचानक से यादव उपनाम लिखना शुरू कर दिया।
जबकि गुजरात,महाराष्ट्र के अहीर आज भी खुद को यादव नही लिखते हैं।


शुद्ध रक्त के यदुवंशी क्षत्रिय सिर्फ राजपूतो और मराठो में जादौन, भाटी,जडेजा, चुडासमा,जाधव,छोकर,सलारिया
हैहय,कलचुरी,सरवैया आदि वंशो में मिलते हैं,
इन सब यदुवंशी क्षत्रिय शाखाओ और उनकी रियासतों की पूरी डिटेल हम अलग से दंगे।


श्री कृष्ण जी का छत्र जो आज भी जैसलमेर मे श्री कृष्ण जी वंशज भाटी वंश के  राजपूत परिवार पर सुरक्षित रखा हुआ है जो इस बात का सबसे पुख्ता सबूत है कि श्री कृष्ण जी के असली वंशज भाटी है ना कि वो लोग जो तथ्यहीन बाते और लोगो को बरगलाने के स्वघोषित श्री कृष्ण जी के वंशज खुद को बताकर राग अलाप रहे है --!!
हाल ही में गुजरात में न्यायालय द्वारा जाडेजा राजपूतों को श्रीकृष्ण का वंशज होने की मान्यता दी गयी है।


अन्य समाज में यदुवंश या तो राजपूत पुरुषों के उन वर्गों की महिलाओ से अंतरजातीय विवाह से उत्पन्न हुआ है अथवा उन्होंने छदम यदुवंशी का रूप धारण कर लिया है......
कुछ यदुवंशी अंतरजातीय विवाह के कारण जाटों में भी मिल गये हैं,जैसे 

भरतपुर का राजवंश--
करौली के जादौन राजपूत बालचंद्र नेे सोरोत गोत्र की जाट कन्या का डोला लूटकर उससे विवाह कर लिया।उसकी संतान जाटों में मिल गयी और उससे उनमे सिनसिनवार वंश चला और भरतपुर की गद्दी की स्थापना की।
पटियाला,नाभा,जीन्द फरीदकोट की जट्ट सिख रियासते----
जैसलमेर के भाटी राजपूत पंजाब 12 वी सदी में पंजाब आये। इनमे से फूल सिंह ने जाट लडकी से शादी की जिनकी सन्तान आज सिद्धू,बराड आदि जट्ट सिख हैं इन्होने वहां पटियाला,नाभा,जीन्द,फरीदकोट आदि रियासत स्थापित की जो आज फूल्किया कहलाती हैं।जो शुद्ध रहे उन्होंने हिमाचल की सिरमौर रियासत स्थापित की।
एनसीआर के भाटी गुज्जर----
जैसलमेर के रावल कासव और रावल मारव बुलंदशहर आये इन्होने यहाँ धूम मानिकपुर रियासत की स्थापना की जिसमे 360 गाँव थे। पर बाद में यहाँ के बहुत से भाटी राजपूत समीपवर्ती गूजरो से शादी विवाह करके गूजरो में शामिल हो गये और आज भाटी गूजर कहलाते हैं।इस इलाके में और समीपवर्ती पलवल में आज भी भाटी राजपूत पाए जाते हैं।


शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह----
स्वयं पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह जिनके पूर्वज सांसी जाति के थे और बाद में शक्तिशाली होने के कारण इस वंश के साथ दुसरे सिख जाट मिसलदारो ने शादी विवाह किये जिससे यह सांसी जाति से निकलकर जाटों में शामिल हो गये,यह सांसी जाति अपनी उत्पत्ति सांसमल नाम के भाटी राजपूत से मानती है,इनका वंश सांसी जाति से निकलकर जाटों में संधावालिया कहलाया.
इसी तरह पंजाब और हरियाणा का सैनी(शुद्ध सैनी न कि माली) समुदाय भी मूल रूप से मथुरा का यदुवंशी है 

इसी प्रकार मुस्लिम मेव जाति में भी यदुवंश पाया जाता है।
भारत में शुद्ध क्षत्रिय राजपूत यदुवंशियों की प्रमुख रियासते करौली,जैसलमेर,कच्छ,भुज राजकोट, जामनगर,सिरमौर,मैसूर आदि हैं.
दक्षिण का विजयनगर साम्राज्य, होयसल,देवगिरी आदि भी यदुवंशियो के बड़े राज्य थे।
पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में भी बड़े बड़े भाटी मुस्लिम राजपूत जमीदार हैं,सिंध में सम्मा,भुट्टो,भुट्टा भी यदुवंशी राजपूत हैं।...

उत्तर पश्चिम भारत के अतिरिक्त महाराष्ट्र में भी मराठा क्षत्रियो में जाधव वंश(यदुवंशी) पाया जाता है.छत्रपति शिवाजी की माता जीजाबाई भी यदुवंशी क्षत्राणी थी,दक्षिण की अर्यासु जाति और राजू जाति में भी यदुवंश मिलता है।
खैर योगीराज श्री कृष्ण ईश्वर का अवतार हैं,उनकी आराधना का अधिकार समस्त सनातन धर्मावलम्बियों को है.....
पर सच क्या है और झूठ क्या है ये सबके सामने आना चाहिए।
सभी यदुवंशी राजपूतो से विनती है कि अपने नाम के आगे शाखा के साथ साथ यदुवंशी जरुर लिखें।
जय श्रीकृष्ण जय राजपुताना।

78 comments:

  1. Kisnaut yadav kisme ate h. Kisnaut gotra.

    ReplyDelete
    Replies
    1. No kisnauth koi gotra nhi balki parich hy bhai i am yaduvanshi kshritya in( manjhraut ) from patna

      Delete
  2. अहीरों की ऐतिहासिक उत्पत्ति को लेकर विभिन्न इतिहासकर एकमत नहीं हैं। परंतु महाभारत या श्री मदभागवत गीता के युग मे भी यादवों के आस्तित्व की अनुभूति होती है तथा उस युग मे भी इन्हें आभीर,अहीर, गोप या ग्वाला ही कहा जाता था।[21] कुछ विद्वान इन्हे भारत मे आर्यों से पहले आया हुआ बताते हैं, परंतु शारीरिक गठन के अनुसार इन्हें आर्य माना जाता है।[22] पौराणिक दृष्टि से, अहीर या आभीर यदुवंशी राजा आहुक के वंशज है।[23] शक्ति संगम तंत्र मे उल्लेख मिलता है कि राजा ययाति के दो पत्नियाँ थीं-देवयानी व शर्मिष्ठा। देवयानी से यदु व तुर्वशू नामक पुत्र हुये। यदु के वंशज यादव कहलाए। यदुवंशीय भीम सात्वत के वृष्णि आदि चार पुत्र हुये व इनहि की कई पीढ़ियों बाद राजा आहुक हुये, जिनके वंशज आभीर या अहीर कहलाए।[24]

    “ आहुक वंशात समुद्भूता आभीरा इति प्रकीर्तिता।(शक्ति संगम तंत्र, पृष्ठ 164)[25] ”

    इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि यादव व आभीर मूलतः एक ही वंश के क्षत्रिय थे तथा "हरिवंश पुराण" मे भी इस तथ्य की पुष्टि होती है।[26]

    भागवत मेँ भी वसुदेव ने आभीर पति नन्द को अपना भाई कहकर संबोधित किया है व श्रीक़ृष्ण ने नन्द को मथुरा से विदा करते समय गोकुलवासियों को संदेश देते हुये उपनन्द, वृषभान आदि अहीरों को अपना सजातीय कह कर संबोधित किया है। वर्तमान अहीर भी स्वयं को यदुवंशी आहुक की संतान मानते हैं।[27]

    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, अहीरों ने 108 A॰D॰ मे मध्य भारत मे स्थित 'अहीर बाटक नगर' या 'अहीरोरा' व उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले मे अहिरवाड़ा की नीव रखी थी। रुद्रमूर्ति नामक अहीर अहिरवाड़ा का सेनापति था जो कालांतर मे राजा बना। माधुरीपुत्र, ईश्वरसेन व शिवदत्त इस बंश के मशहूर राजा हुये, जो बाद मे यादव राजपूतो मे सम्मिलित हो गये।[1]

    ReplyDelete
  3. Kya Rewadi Yaduwanshi Aheer Yadav Nahi Hai

    ReplyDelete
  4. Please Bhai Ek bar khakhar Rajputo Ka history padh lo wo kis jati k the

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bhati ka khahi jikr nahi mahabhata mein
      Jhoota bol raha

      Delete
    2. Yadav cash khatma ho gaya gandhari me Sharpe se .tum kaha she ayey ho.

      Delete
  5. ARCHIOLOGICAL SARVEY OF INDIA K ANUSAR TRIKUTA K ABHIR (AHEER)HOYESEL YADAV DWARSAMUDRA K SEUNA YADAV,R=CHAUKUKYA VANSH K YADAV SABHI KRISHANA PUTRA SAMB AUR PRADUMAN K VANSHAJ HAI.CHUDASAMA RAJKUMAR GARHRIPU KO AHIR AUR YADAV DONO NAMO SE SAMBODHIT KIYA JATA HAI.MAUSHUL PARVA ME SPAST HAI KRISHAN NE SAMP KO SHOP DIYA THA KI TUMHARE PATNIYO KA BHOG ABHIR KARENGE WO ABHIR KOI AUR NAHI KRISHAN PUTRA ANIRUDH K VANSAJ THE JO US SAMAY ABHIRWAL K SARDAR THE ARJUN DWARA HASTINAPUR JATE SAMAY AURAT AUR BACHCHO KO LUTANE WALE ABHIR JO KRISHANK HI VANSHAJ THE JO KRISHAN K SAMAY ME HI ABHIRWAL K SASHAK BAN GAYE THE .JO BATD ME JANMEJAI K YAG ME NAGWANSHIYO K VINASH ME AHAM YOGDAN DENE K KARAN AHEER(AHI+ARI )NAGO K DUSHAMAN K SAMMAN SE SUSHOBHIT KIYE GAYE. PLEASE BE ONE PLEASE MERE EK SAWAL KA JAWAB DE AKHIR YADUWANSH K HI ITANE TUKADE KYO.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bhai abheet anirudh ke vansas kahan se hogye .... Anirudh ka beta jo pradyumn tha uski saadi kirat kingdom ke raja banasur ki betiusha se hua tha aur jb dwarka dub rhi thi to jo usha ka beta chotha balak tha naam tha braj nabh jisko arjun bacha kr lapya aur mathura jo andhak rajya ki rajdhani thi gaadi pr bithaya baad me braj nabh ne brajhmandal basaya .. aur tum bol rhey is bachey ke vansas bhi hogye bahut saarey abhir..

      Delete
    2. Brjh nathe Sri Krishna ji purv bête the..

      Delete
  6. अमरकोष मे गोप शब्द के अर्थ गोपाल, गोसंख्य, गोधुक, आभीर, वल्लब, ग्वाला व अहीर आदि बताये गए हैं।[5]

    प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश के अनुसार भी अहिर, अहीर, आभीर व ग्वाला समानार्थी शब्द हैं।[6] हिन्दी क्षेत्रों में अहीर, ग्वाला तथा यादव शब्द प्रायः परस्पर समानार्थी माने जाते हैं।.[7][8] वे कई अन्य नामो से भी जाने जाते हैं, जैसे कि गवली,[9] घोसी या घोषी,[10] तथा बुंदेलखंड मे दौवा अहीर।

    ReplyDelete
  7. जिसने भी ये यादवो के बारे में ये सूचनाएं डाली है उसे यादव जाती के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है, पहली बात तो यादव चंद्रवंशी होते है, इसी कारण यादव क्षत्रिय होते है, दूसरी बात यादव भगवान श्री कृष्ण के ही वंशज है, तीसरी बात रही गांधारी के श्राप की तो अर्जुन ही द्वारका नगरी से यादवो को सुरक्षित ले कर आया था, चौथी बात राजपूत मतलब ठाकुर जाती के लोगो से नही होता इसलिये चंद्रवंसी होने के साथ यादव राजपूत भी है लेकिन इसका मतलब ठाकुर जाती के समुदाय से बिलकुल भी नहीं है, पांचवी और आखरी बात जो लोग यादव जाती पर सवाल उठाते है, वो यादव जाती से जेलस रखते है, और ऐसे लोग किसी भी जाती के सगे नहीं हो सकते। धन्यवाद।
    आपका

    विनोद यादव
    Advocate
    म 9999561580
    9971636880
    Chamber No.606
    Lawyers Chamber Block
    Saket Courts Complex
    New Delhi 110017
    advocatevinodyadav@gmail.com

    ReplyDelete
    Replies
    1. Yadav G mai apke sawal se puri tarah salamat hu aur apne ye baaten sahi batae hai aur apko to ye baat pataa hi hai ki yadav logo se har cost ke log jalate hai ahir to kashtriya hote hain jabki kashtriya kaa matalab thakur se nhi ek vir yodhdha se hai jabki yadav vir-ahir kashtriya Ahir hote hain thanks

      Delete
  8. Bhai kise chutiya bna rhe ho abhiran looti gopiya gop ki gopiya gop matlav aheer.... Sahi kahawat he bheelan looti gopiya

    ReplyDelete
    Replies
    1. sahi kaha bhai abhiran nahi bheelan h

      Delete
  9. Yadav Rajput hote he isse sehmat hu pr jadeja jadaun etc ye gotra the yaduvansh ke jo baad me rajya karne ke karan ek alag astitv ban gaye bo kewal yaduvansh ke gotra he puri Yadav jati nhi...... Or haa sabse phle Ham Hindu he sabhi bhai he ye divide bali soch Band karo

    ReplyDelete
    Replies
    1. bhai ye baat jra lalu n mulayam ko batao

      Delete
  10. भाई मेरे परदादा से पहले से ही यादव अहीर लिखते आ रहे
    हैआप 100 साल बोल रहे जबकि में 150 साल पहले की बात कर रहा
    हुआप ऐसे फोकट के पोस्ट ना
    करे

    ReplyDelete
    Replies
    1. Sahi bat hy bhai because i am yadav (manjhraut )

      Delete
    2. Bhai 100 sal se ahir Yadav likh rahe hai aise gyani ko 100-100juto se pranam abhi hall hi me jail se riha huye kaidi chaudhi Yadav ki umr 104 sal hai aur unke pita shivdev Yadav the aur jail record me bhi yahi maujud hai air ha chauchaura (Gorakhpur) me pratham swatantrata sangram senaniyo ka jo nam darj hai usme bhi Yadav likha gaya hai .an hame apki ginati pr tajjub ho raha hai.1857 me 1st swatantrata sangram huwa tha jara ginati kr le kitane sal huwa.

      Delete
  11. Yadav koi caste nahi he apne cast certificate per delve.

    ReplyDelete
    Replies
    1. भारत सरकार का कोई भी जातिगत दस्तावेज़ देखिये। अहीर आभीर यादव यदुवंशी ये सभी परिभाषित जातियाँ है और भारत का पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिसर्च के रिपोर्ट के अनुसार अहीर असली यदुवंशी है और इतिहास साबित करता है की कालांतर मे कुछ अहीरों ने खुद को यदुवंशी अहीर से यदुवंशी राजपूत मे परिवर्तित कर लिया। जो अपनी जड़ का नहीं वो किसी का नहीं। सभी जड़ है अहीर व गोप जाति। विकिपड़िया पढ़ लो भाति राजपूत भी cattle keeper अर्थात ग्वाले ही थे। किसको उल्लू बनाते हो। हमे क्या पढ्ना लिखना आता नहीं। अब वो प्राचीन ब्रहमिण युग नहीं है भाई। कुछ मुस्लिमों व इसाइयों से सीखो वो सबको एक समझते है और एक हिन्दू के नाम पे कलंक एसे लोग हे जो एक मे से निकले लोगो मे ऊंचा नीचा करके एक से अनेक बनाने मे लगे हो। धिक्कार जैसा काम।

      Delete
    2. tum karo yo sahi ham kare to galat... rajput koi cattel palan wale nahi the vo warrior community hai.... yaha khoon sabit karta hai kon rajpoot hai or ko ahir. mulayam family ko up satta di gyi usko raj karna nahi aaya ... rajpoots ke khoon me raj karna hai... jo hinduo per goliya chalva de vo chhatriya ho hi nahi sakta...... vo bhi ram ke nam per

      Delete
    3. लालू ने राज करना नही आया और अखिलेशने 5 साल क्यों कर लिया पूरा, ओर एक बात अगर ठाकुरो को राज करना आता था तो देश ग़ुलाम क्यों हुआ

      Delete
  12. Yadav koi caste nahi he apne cast certificate per delve.

    ReplyDelete
    Replies
    1. अपना मेल आइ डी भेज और caste certificate देख।

      Delete
    2. Bhati bhai ab tub hame btaoge..... Jo khud kab Yadav ki or bagte ho or kabhi rajput ki or ...... Hahahaha.
      phle tum to koi ek caste chun lo.... .

      Mere caste certificate par Yadav hi likh h... Ek bar Central Govt OBC list dekh kar fir bol Or Yadav hamari caste All india me h or sub-caste ahir h... Central OBC me Yadav hi likh jata h. State OBC me us state ki sub-caste....

      Delete
  13. Jay Shri Krishna - Jai Rajrajeshwari Kaila Devi

    ReplyDelete
  14. Jay Shri Krishna - Jai Rajrajeshwari Kaila Devi

    ReplyDelete
  15. ग्वाल सखाओं की भी यही दशा है, कभी वे व्याकुल और अधीर होते हैं, कभी Ñष्ण की निष्ठुरता पर क्षुब्ध होकर कहते हैं-

    भए हरि मधुपुरी-राजा, बड़े बंस कहाय।

    सूत मागध बदत बिरुदहि बरनि बसुधौ तात।।

    राजभूषन अंग भ्राजत, अहिर कहत लजाज।।

    ReplyDelete
  16. कहावत ऐसे नहीं है इस तरह गुमराह न करें असली कहावत इस तरह है। मनुष बली नहि होत है ,समय होत बलवान | भीलन लूटी गोपिका, वही अर्जुन वही बान ||

    ReplyDelete
    Replies
    1. Dear Mr Vishnu , perhaps you Ahirs have created this
      Because Ahirs attack yaduvanshis not bhils

      Delete
  17. Bhaiyo Yaduvansh se hi aheer Bane h PR iska MATLAB ye nhi ki Yadav Yaduvanshi kshtriy nhi h . Aheer ek branch h Yaduvansh ki . Yadav name lgane ki wajah s kshtriy Badal nhi jaate

    ReplyDelete
  18. Chandravansh se Yaduvansh h or is se hi ahir Yadav or Yaduvanshi Rajput h . Yadav ek surname h jo chalta AA Raha h . Yadav lgane s Yadav aheer NI ho Gaye . Saare khstriy h .

    ReplyDelete
    Replies
    1. agar aisa hai yo hamai govt. chutiya hsi ahiro ko reservation kyu. baki chhatiyo ko kyu nahi.... can u give any valid reason

      Delete
    2. Bahi mere reservation unee di jati h jo population m jayada ho .. tere kahane ka mtlb h ki Google (Wikipedia)chutiya h ki yeh bata h ki yadav ahir yaduvanshi sab ek h tu chutiya h mere bahi aur ahiro k baare m mat bol jayada

      Delete
  19. आहुक वंशात समुद्भूता आभीरा इति प्रकीर्तिता।(शक्ति संगम तंत्र, पृष्ठ 164

    ReplyDelete
  20. ye prithviraj chauhan ka poster kyun lagaye ho...mujhe kuch samajh nahi aaya...main chauhan hun aur mujhe bhi bahut kuch pata hai.....aur bhaiyon jo pehle lade hai wo sab kshatriya hai....aur kshatriyon ko kuch bhi maangna nahi chahiye

    ReplyDelete
  21. Sahi bat bole praduma yadav g i am yaduvanshi kshritya (manjhraut ) mantu singh yadav patna

    ReplyDelete
  22. Yadavon ko shaap mila hua hai ki WO Kshatriya hokar bhi raja nahi ho sakte. Yah shaap chandravanshi raja yayati be apne bade bete yadu ko diya tha. Iske bavjood kai yadav mashoor raja bane par unme she adhikansh atyachari ho gaye jaise mahismati ka sahasrabahu air mathura ka kans. shayad shaap ullanghan ka fall ho. air tabse yadavon ki social status girti hi chali gayi. chunki yadav kul bahut purana hai kyunki rigved me yadu Jan ka varnan hai. Isliye sambhav hai ki us samay ke samaj me jab gopalan hi aaryon ka mukhya pesha tha to kai yadavon be use apnaya ho air aaj tak us parampara ko dho rage gain. Us samay to samaj varnvihin tha par bad me uttarvaidik kal me barn vyavastha ka uday hua. Tab ho sakta hai ki yadu kul bhi kshstriyon air vaiyshyon me barn gaya hoga. Aur bad KE kal me jab barn vyavastha kathor hoti chali gayi tab yadavon ka star air gir gaya ho. waise yadavon ka poorn Nash Krishna KE kal me nahi hua yah varnan srimadbhagwat me hai. Lenin koi bhi poorn daawe KE sath nahi kah Sakta ki paanch hazaar saalon me uski jaati mishran se bachi ho. Yah bahut bada samay hota hai air is me bahut uthapatak ki sambhavna hai. Cause romila thapar apni kitab bharat ka itihas me likhti hain ki ahir jat air gurjar apna udbhav Kshatriyon she manti hain air inhone apni jaatiya stithi Gavan Di hai. Samay hot balwan.

    ReplyDelete
  23. Here is link to the work of English scholar investigating tenuous and mostly spurious link between true descendants of Krishna and modern day Ahirs/Gwalas and Neo-Yadavs:

    http://www.sainionline.com/colonial-ethnologies/colonial-ethnologies--the-ahirs


    "The Dyashraya-Kavya of Hemchandra speaks of a Chordasama prince reigning near Junagarh as an Abhira and a Yadava. But this is no doubt very conjectural, and the simple fact that Krishna was a herdsman  would be a sufficient reason for the Ahirs to claimn connection with him. It is pointed out that the names of Abhira chieftains  given in the early inscriptions are derived from the god Siva, and this would not have been the case if they had at that epoch derived their origin from Krishna, an incarnation of Visnu. " If the Abhiras had really been the descendants of the cowherds (Gopas) whose hero was Krishna, the name of the rival god Siva would never have formed components of the names of the Abhiras, whom we find mentioned in inscriptions. Hence the conclusion may  safely be drawn that the Abhiras were by no means connected with Krishna and his cowherds even as late as about A.D. 300, to which date the first of the two inscriptions mentioned above are assigned. Precisely the same conclusion is pointed to be the contents of the Harivanshi and Bhagwat Purana. The upbringing of Krishna  among the cowherds and his flirtations with the milkmaids are again and again mentioned in these works, but the word Abhira does not occur even in the connection. The only words we find used are Gopa, Gopi and Vraja. This is indeed remarkable. For the descriptions of the removal of Krishna as an infant to Nanda, the cowherd's hut, of his childhood passed in playing with the cowherd boys, and of his youth spent in the amorous sports with the milkmaids are set forth at great length, but the word Abhira is not once again met with. From  this only one conclusion is possible, that is, that the Abhiras did not originally represent the Gopas of Krishna. "

    ReplyDelete
  24. Some more information on Saini Yaduvanshi Rajput kings of Mathura, Karauli and Delhi:

    http://www.sainionline.com/list-of-saini-yaduvanshi-kings

    http://www.sainionline.com/origin-of-saini-caste-from-yadu-rajputs

    ReplyDelete
  25. The following is reference to a historical Buddhist text (GHATA-JĀTAKA) which clearly shows that Nand was not a Yadava but a servant of Yadavas in the times of Krishna:

    http://www.sacred-texts.com/bud/j4/j4018.htm

    ReplyDelete
  26. According to Ghata-Jataka, a historical Buddhist text:

    "Now, Devagabbhā had a female servant named Nandagopā. The woman’s husband, Andhakavenhu, was also her servant. "

    ReplyDelete
  27. ham asli yaduvanshi hai jinhe log jadouv kahte hai, qunki brij ki boli me ya ko j bolte hai isliye yadov ka jadou ho gya or log hmko jadou ya jadubanshi khne lge hai, jbki na hm rajput hai or na hi hm ahir hai...

    ReplyDelete
  28. भुट्टो और भुट्टा यदुवन्शी राजपुत नही है चालुक्य राजपूत वंश के है

    ReplyDelete
  29. भुट्टो चालुक्य राजपुत है

    ReplyDelete
  30. bhai ap ka ye lekh u.p k yadavo ko nind se jagane ka hi kam kiya aur unhone hindutva ka sath de kr sachhe kshatriya hone ka praman prastut kr diya. thanks

    ReplyDelete
  31. खुद को यदुवंसी राजपूत बुलाते हो । तुम लोग की पुरानो में कोई बात भी नहीं आती । और हम यादव की गाथा पुरानो में :वेदों में हे । इस लिए हम ही यदुवंसी हे और हमे ही रहे गे।: और रही राजपूत की बात तो:6.मी सदी से अप लोग की बात हे ।उस से पहले की कोई बात ही कहा हे। और यादव तो उस से पहले के हे तो इस लिए हमे ही ओरनिजल यदुवंसी हे और हमे सा रहे गे

    ReplyDelete
    Replies
    1. tum ahir ho yadav nahi.... ek yadav bhagwan ram ke logon per goli nahi chalava sakta vo ek ahir hi je sakta hai.... chhatiya khoo n kabhi thanda nahi ho sakta

      Delete
  32. इस चुतियें की इतनी जल रही है यादवो से की खुद की कहानी लिख रहा है

    ReplyDelete
    Replies
    1. jal to tei rahi hai jo tu aisi bhasha use ke raha hai

      Delete
  33. Sub caste: Charak
    Caste:Rajput
    Gotar:Bhardwaj
    Vansh:surya
    Kon say rajput hai?

    ReplyDelete
  34. bhagwan sri krishna jab kudh vrindawan chhorkar ja rahe the tab unhone waha ke vasiyo ki apna saga and sambhandhi bataya tha aur hmhe tere jaise dogle se pramaan ki jarurat nhi h/////

    ReplyDelete
    Replies
    1. mathura me kitne pecent yadav( ahir) hai

      Delete
  35. Today's Yadavs aka Ahirs or gops or gwalas are actually not a single caste. The only thing that connects them is surname yadav which they start using from 20th century onwards. Rewari Ahirs were first to declare themselves Yadavs in about mid of 19th century.This is not the case of Ahirs only. Any one search for Sanstrikization in google. In India every second obc and sc caste wants to declare themselves Kshatriya or brahmin
    Truth is no one of them is actual yadav.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Chal bhai rajputo man lete hai tum Yadav ho pr tumne Yadav likhana KB chhod diya .boli badal sakti hai bhasha badal sakti hai pr likhane me to nam nahi badal sakta .aur ha jalo mat brabari karo .

      Delete
  36. ye sale hair bhais charane vale apne ko mahan banane me lage hai eska to ye matlab nhi ki dusre ko apna bap bana le par ye sale dogala hone ko bhi raji hai jo aone ko kshatriya ki aulad bta rhe hai * khun bahate aaye hai sabse uchi shan hai etihas ke panno par bhi likha rajputo ka nam *ese mita de kisiki aukat nhi

    ReplyDelete
  37. Baahmno k Baad jaatiwaad ...Main ye main wo..Krna ye theka tumne hi le rakha hai...Baaki asli Yadav Ahir asli hi rahenge ..Ab wo time gya jab manusmriti likhi gyi thi..ABCD padha di thi Janta Ko ...

    ReplyDelete
  38. यादव से जलने वाले जल जल के काले हो गए उनकी बहन हमारी फैन वो हमारे साले हो गए
    जब यादव के बारे में कुछ पता ही नही तो क्या बताते हो
    मै केवल इतना बता दूँ की इस पूरी पृथ्वी पर गोप जाति से पवित्र कोइ जाति नही
    श्री कृष्ण भगवान ने गीता में कहा है धर्म के उद्धार के लिए केवल यादवों का साथ ही काफी है

    ReplyDelete
  39. Mantu singh @ this is shubham from patna and i am also majroth .and i belongs to patna city .i knw only one tHing that we yadavs are cool.
    Jai yadav jai madhav

    ReplyDelete
  40. जादौन/गादौन पठान जाति से सम्बद्ध थे
    जो अफ़्ग़ानिस्तान में अब भी है ।
    भारत में वही जादौन ठाकुर लिखने लगे ..

    ReplyDelete
  41. जादौन/गादौन पठान जाति से सम्बद्ध थे
    जो अफ़्ग़ानिस्तान में अब भी है ।
    भारत में वही जादौन ठाकुर लिखने लगे ..

    ReplyDelete
  42. Yadav ahir hai ki nhi,ye kshatriya hai k nhi,in sabdo ka koi matlab nhi. Ahir vir hote h aur ithias banate h,is duniya m yaduvansh ko ahiro ne janaya h,dusre jaatiyo m lipte huye maakaro n nhi. Jo yadav h vo shaan se bolte h hum yadav h.....kyonki Yadav dusre sabd ka mohtaaz nhi. Yadav abhir h vir h.

    ReplyDelete
  43. Yadav ahir hai ki nhi,ye kshatriya hai k nhi,in sabdo ka koi matlab nhi. Ahir vir hote h aur ithias banate h,is duniya m yaduvansh ko ahiro ne janaya h,dusre jaatiyo m lipte huye maakaro n nhi. Jo yadav h vo shaan se bolte h hum yadav h.....kyonki Yadav dusre sabd ka mohtaaz nhi. Yadav abhir h vir h.

    ReplyDelete
  44. अहीर अहीर है और यदुवंसी क्षत्रिय इनसे बिलकुल अलग है अहिरो और यदुवंशियों का दूर दूर तक कोई मेल ही नहीं है।
    राजपूत क्षत्रिय जाती अलग है और अहीर अलग
    अहिरो के द्वारा यदुवंसी क्षत्रियो को बदनाम किया जा रहा है।
    ऊपर का विस्लेसँ बिलकुल सही सत्य और सटीक है।
    भगवान श्रीकृष्ण क्षत्रिय थे इसका ये मतलब नहीं की जिन अहिरो के यहाँ उनका बचपन बीता ओ अहीर भी क्षत्रिय बन गए।।
    उनको पता होना चाहिए की अहीर अलग जाती है क्षत्रिय अलग ।।
    अहीर एक पिछड़ी जाति है। जो पिछड़ी जाति होने की वाजः से आरक्छन का लाभ ले रही है।
    अहीर क्षत्रियो के दास हुआ करते थे।
    जो लठैत का और रखवाली का काम करते थे।
    ये अहीर आज के समाज के जाट गुजर कुर्मी कोइरी garadiya के सामानांतर है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. Sonch aap ki baat aap ki ,raksha karne wala hi Kshatriya hota hai ..kyoki ki aap ko jarurat ek ahir ki padi chahe vah lathait me roop me hi kyo na ho ..

      Delete
  45. Chauhan bhi to obc se aate hai to kya
    Prithvi raj chauhan kshatriya nahi the

    ReplyDelete
  46. Kabhi yaduvanshi ki Wikipedia padh lena

    ReplyDelete
  47. Yaduvansi hi Yadav hote h jisne bhi ye jankari Dali h unko bul kul bhi Yadav caste k bare me jankari nhi h shri Krishna Yadav the or unke pita vasudev bhi Yadav hi the jisko taken na Ho to wo google or search kr le

    ReplyDelete