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मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था??(Did Prithviraj chauhan killed Mohmmad ghauri?)

Did Prithviraj Chauhan killed Mohmmad Ghauri????? मौहम्मद गौरी का वध किसने किया था? सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अथवा खोखर राजपूतो ने??...

Friday, October 2, 2015

===मोदी सरकार से क्षत्रियों की माँग भाग संख्या-2===

===मोदी सरकार से क्षत्रियों की माँग भाग संख्या-2===
---राज्यवार राजपूतो की राजनीति में भागीदारी की समीक्षा और बीजेपी में राजपूतों की उपेक्षा पर रोक की मांग---
क्षत्रिय समाज हमेशा से भाजपा की रीढ़ रहा हैँ।क्षत्रिय समाज ने हमेशा से भाजपा को बिना किसी स्वार्थ के समर्थन दिया है जबकि आज तक क्षत्रियोँ को भाजपा से इसके बदले कुछ नहीँ मिला। बल्कि भाजपा और उसकी सरकारोँ ने हमेशा क्षत्रियोँ हित के विरोध में ही काम किया है फिर भी क्षत्रिय कट्टर राष्ट्रवादी होने की वजह से हमेशा भाजपा का समर्थन करता रहा हैँ।इस बार भी केंद्र में मोदी सरकार को लाने में क्षत्रिय समाज का सबसे अहम योगदान हैं। इसलिये मोदी सरकार से क्षत्रियोँ की अपेक्षाए होना अवश्यम्भावी है।
लेकिन ये हमे भी पता है की भले ही भाजपा हमारे वोटों से जीते लेकिन वो ग़ुलामी हमेशा उन लोगोँ की करेगी जिनके वोट के लिये उसे हाथ फ़ैलाने पड़ते है और जो निर्मम होकर उससे अपनी मांगे मनवाते है।
इस समय देश में लगभग 40 राजपूत सांसद हैं जिनमे बीजेपी से 38 हैं और दो उड़ीसा में बीजू जनता दल से हैं,ये सिद्ध करता है कि देश भर में राजपूतों ने मोदी के नाम पर बीजेपी को ही एकतरफा समर्थन किया था,पर बीजेपी में राजपूतों को वो सम्मान नही मिला जिसके वो हकदार थे,
मोदी जी आपने अपने मंत्रिमंडल में 8 राजपूतो को मंत्री बनाया है,जो पिछली सरकारों से बहुत बेहतर है,किन्तु राज्य स्तर पर बीजेपी द्वारा राजपूतों को नजरअंदाज किया जाता है,
सबसे पहले गुजरात की बात करते हैं -----
गुजरात में राजपूत समाज और उसकी उपजातियों की बड़ी भारी संख्या है जो कुल आबादी का 15% से भी अधिक है।
गुजरात में लगभग 18 राजपूत विधायक ओर सांसद शून्य हैं।
मोदी जी आपके अपने राज्य गुजरात में बीजेपी ने एक भी राजपूत को लोकसभा टिकट नही दिया,जो पहली बार हुआ,जबकि वहां राजपूत बीजेपी को ही समर्थन देते हैं और राजपूत समाज के कार्यक्रमो में भी मोदी जी खूब भाग लेते हैं।फिर आपके अपने राज्य में राजपूतो की इतनी घोर उपेक्षा क्यों???? मोदी जी आप से यह भी मांग है कि गुजरात में बीजेपी में राजपूतों की उपेक्षा बंद की जाए।
अब बात राजस्थान की--------
राजस्थान में 8-10% राजपूत आबादी है और इतनी ही संख्या राजपूतो की उपजातियों की भी है।जो सदियों से भगवा झंडा थामे हुए है।यहाँ तक कि कई जगह कायमखानी मुस्लिम राजपूत भी बीजेपी को ही समर्थन करते हैं।
मगर उन्हें मिला क्या?
राजस्थान में गत लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 25 सीटों में से सिर्फ तीन राजपूतों को टिकट दिया जबकि जाटों को 9 टिकट दिए।राजपूत समाज जनसंघ के जमाने से बीजेपी का झंडा थामे हुए है और बीजेपी की रीढ़ की हड्डी रहा है।और जाट हमेशा से कांग्रेस समर्थक रहे हैं।
राज्य में लगभग 28 राजपूत विधायक और मात्र 3 सांसद हैं।
वहां जसवंत सिंह जैसे महान नेता को अपमानित कर उनका टिकट काट दिया गया,राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे निरंतर राजपूतों की अनदेखी और सिर्फ जाट हित की राजनीति कर रही है.
राजस्थान की राजपूत विरोधी मानसिकता की अहंकारी मुख्यमंत्री वसुंधरा को हटाकर किसी अन्य योग्य(मानवेन्द्र सिंह,राजेन्द्र राठौर,राव राजेन्द्र सिंह शाहपुरा आदि) को मुख्यमंत्री बनाया जाए,अन्यथा वहां बीजेपी की लुटिया डूबनी तय है,
उत्तर प्रदेश के सम्बन्ध में-------
उत्तर प्रदेश राजनितिक रूप से देश का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है।यहाँ मुख्यधारा के राजपूतो की ही आबादी 10% से अधिक है और राजपूत समाज की उपजातियों और मुस्लिम राजपूतो की कुल संख्या भी 15% से ऊपर है जो राजपूतो के साथ मिलकर ही मतदान करते हैं।यूपी में सर्वाधिक 14 सांसद और 78 विधायक राजपूत हैं।यूपी सरकार में भी दस मंत्री राजपूत हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा सांसद और विधायक राजपूत समाज से ही चुनकर आते हैं।पूर्व में बीजेपी के समर्थन से चल रही मायावती सरकार ने राजा भैया पर पोटा लगाकर जेल में डाल दिया था जिससे राजपूतो की नाराजगी के कारण बीजेपी आज तक सत्ता से बाहर है।इसका लाभ सपा को मिला और अभी हाल में यूपी की सपा सरकार ने महाराणा प्रताप जयंती पर अवकाश घोषित किया है जिसका राजपूतो में अच्छा सन्देश गया है।बगैर राजपूतो के समर्थन के बीजेपी उत्तर प्रदेश में सत्ता में नही लौट सकती।
अत:आपसे मांग है कि आगामी विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में किसी राजपूत को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए,यूपी में योगी आदित्यनाथ,राजनाथ सिंह,पंकज सिंह,संगीत सोम,जनरल वी के सिंह में से किसी एक को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए,तो बीजेपी यूपी में सरकार जरूर बना सकती है अन्यथा इस बार भी निराशा ही हाथ लगेगी।
बिहार के सम्बन्ध में-----
बिहार में 8% राजपूत आबादी है।जो पारम्परिक रूप से बीजेपी के साथ है।कुछ लालू प्रसाद को भी समर्थन करते हैं।
बिहार में जल्दी ही होने वाले विधानसभा चुनाव में राजीव प्रताप रूडी,राधामोहन सिंह राजेन्द्र सिंह में से किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए,सुशील मोदी के नेतृत्व में बिहार में बीजेपी की हार निश्चित है,
बिहार में 6 सांसद और 31  विधायक राजपुत हैं।
अगर बीजेपी बिहार में राजपूत को आगे कर चुनाव लड़ती है तो बीजेपी की जीत सुनिश्चित है,
क्षत्रिय शेर और सर्वसमाज के नेता आनंद मोहन सिंह को नितीश कुमार और बीजेपी के ही सुशील मोदी,लालू प्रसाद यादव ने झूठे केस में फंसाकर उम्र कैद की सजा करवा दी थी,और आनंद मोहन आज उस जुर्म की सजा काट रहे हैं जो उन्होंने किया ही नही है,अगर बिहार में जीतना है तो आनंद मोहन को न्याय दिलाएं और उन्हें जेल से बाहर लाने में सहयोग करें,
पंजाब,हरियाणा,दिल्ली में पूर्ण उपेक्षा----
इन तीन राज्यों में वैसे तो राजपूतो की संख्या मात्र 2 से 5% के बीच ही है।पर इनका एकमुश्त समर्थन बीजेपी को मिलता रहा है।पर बीजेपी ने इन राज्यों में राजपूतो को कभी भी सम्मान नही दिया।टिकट वितरण और मंत्रीमण्डल में भी हमेशा राजपूतो को दरकिनार किया जाता है।
पंजाब में गत लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर लोकसभा सीट से ठाकुर स्वर्ण सिंह सलारिया का टिकट वापस लेकर विनोद खन्ना को दे दिया गया।
पठानकोट होशियारपुर गुरुदासपुर रोपड़ आदि जिलो में राजपूत आबादी अच्छी है पर बीजेपी ने सिर्फ एक टिकट पीछले विधानसभा चुनाव में दिया।पंजाब में सिर्फ एक राजपूत विधायक है।
हरियाणा में मात्र 3 टिकट विधानसभा में दिए जिनमे 2 टिकट मुश्किल सीट पर दिए।मात्र श्याम सिंह राणा जीत पाए पर वरिष्ठ और योग्य होने के बावजूद उनको मंत्री नही बनाया।भिवानी करनाल लोकसभा सीटों पर अच्छे खासे राजपूत वोट होने के बावजूद बीजेपी ने हरियाणा में कभी भी राजपूतो को कोई लोकसभा टिकट नही दिया।
दिल्ली में लोकल राजपूत कम हैं पर यूपी बिहार उत्तराखण्ड आदि के लाखों राजपुत दिल्ली में रहते हैं जिन्हें कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने कभी भी टिकट के काबिल नही समझा।
इस बार आम आदमी पार्टी ने राजपूतो को दिल्ली में तीन टिकट दिए और जीतने के बाद दो मंत्री भी बना दिए।मनीष सिसोदिया को उपमुख्यमंत्री भी बनाया गया।
मोदी जी दिल्ली हरियाणा पंजाब राजपूत विहीन नही हैं।कम से कम अब तो समझ जाइये,वरना बाद में राजपूत अपनी उपस्थिति आपको जरूर समझा देंगे।
उत्तराखण्ड,हिमाचल,जम्मू कश्मीर में -----
उत्तराखण्ड की कुल जनसँख्या में 35% सिर्फ राजपूत हैं और बिना राजपूतो के यहाँ कोई सरकार नही बन सकती।पर चुनाव से पहले ठाकुर वोट लेने को ठाकुर भगत सिंह कोश्यारी को आगे किया जाता है और बाद में भुवन चन्द्र खंडूरी और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे ब्राह्मण नेताओं को मुख्यमन्त्री बना दिया जाता है।
उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी राजपूत आबादी के साथ ये अन्याय क्यों????
हिमाचल प्रदेश में कुल 30% जनसँख्या राजपूतो की है और वहां की राजनीति में राजपूतो का जबरदस्त होल्ड है।कांग्रेस हो या बीजेपी सरकार मुख्यमन्त्री राजपूत ही बनता है।
पर हर प्रकार से योग्य युवा होने के बावजूद सांसद अनुराग ठाकुर जो पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के पुत्र हैं को केंद्र में मंत्री क्यों नही बनाया गया???
जम्मू कश्मीर में हिन्दू राजपूत जम्मू के इलाके में हैं और राज्य में इनकी अनुमानित जनसँख्या 10% है।जम्मू की राजनीति में राजपूतो का होल्ड है।
केंद्र में डॉक्टर जीतेन्द्र सिंह को मंत्री और जम्मू कश्मीर का उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह को बनाया गया है।दो राजपूतो को बड़ी भूमिका देने के लिए आपको आभार।
मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़, झारखण्ड,उड़ीसा में -------
मध्य प्रदेश में कुल 8% राजपूत आबादी है जो बीजेपी और कांग्रेस को बराबर समर्थन करती है।दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रिकाल तक मध्य प्रदेश में राजपूतो की एकछत्र सत्ता थी पर जब से बीजेपी सरकार आई है राजपूतो की स्थिति और वर्चस्व में भारी गिरावट आई है।
बीजेपी से तीन राजपूत सांसद हैं और नरेंद्र सिंह तोमर केंद्र में कैबिनेट मंत्री हैं।बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नन्दकुमार सिंह चौहान(सांसद) भी राजपूत है।
छत्तीसगढ़ में मात्र 3-5% राजपूत आबादी होते हुए भी बीजेपी से ठाकुर रमन सिंह लगातार मुख्यमन्त्री बन रहे हैं।उनके पुत्र भी लोकसभा सांसद हैं और स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के पुत्र राज्यसभा सांसद हैं।
झारखण्ड में राजपूत आबादी 4-5% है ये भी आदिवासी बाहुल्य इलाका है पर कुल 14 में से 2 सांसद राजपूत हैं ओर 8 विधायक,दो मंत्री भी राजपूत हैं।
उड़ीसा में उड़िया राजपूत राजपरिवारों का राजनीती में अच्छा वर्चस्व है यहाँ खंडायत क्षत्रीय वर्ग भी अपनी गिनती राजपूतो में ही मानता है।उड़ीसा में कुल 4 राजपूत सांसद हैं जो बीजू जनता दल से हैं।

महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में-----
महाराष्ट्र में प्रारम्भिक काल में जाने वाले क्षत्रिय राजपूत मराठा क्षत्रिय कहलाए।किन्तु बाद में वहां जाकर बसने वाले राजपूतो की पृथक पहचान बनी रही।
वहां राजपूतो की अधिकतर आबादी खानदेश में है,मुम्बई में उत्तर भारतीयो में अधिकतर राजपूत ही हैं इनके अलावा परदेशी राजपूत भी महाराष्ट्र में मिलते हैं।
इन सबको मिलाकर महाराष्ट्र में लगभग 30 लाख से अधिक राजपूत हैं जो मिलकर राज्य की राजनीति को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं।
भारत की अब तक की इकलोती राजपूत राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल महाराष्ट्र की ही थी।
कर्नाटक में भी राजपूत आबादी लगभग 15 लाख है एक राजपूत मुख्यमन्त्री कांग्रेस के धर्म सिंह भी रह चुके हैं।
ठाकुर आनन्द सिंह विजियानागर हम्पी से बीजेपी विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं ये अरबपति व्यापारी हैं और इन्होंने हम्पी के पास कई सौ करोड़ की लागत से राजपूत नाम का किला भी बनवाया है।
यह तो हुई राज्यवार राजपूतो की राजनीति में भागीदारी की समीक्षा।इससे पता चलता है कि राजपूत समाज जाट गुज्जर अहीर कुर्मी पटेल की तरह एक दो या तीन राज्यों तक सिमित नही है राजपूतो की शक्ति और विस्तार राष्ट्रव्यापी है।राजपूतो को दरकिनार या नजरअंदाज करना बड़ी भारी भूल सिद्ध होगी।
मोदी जी आपकी सरकार का यह सन्देश जा रहा है क़ि आप अरुण जेटली और अमित शाह पर बहुत निर्भर करते हैं,अरुण जेटली जैसे जनाधारविहीन नेता पर यह अन्धविश्वास आपको भारी पड़ेगा,यह आपने दिल्ली विधानसभा चुनाव में इन्हे प्रभारी बनाकर देख भी लिया है,जेटली सूचना और प्रसारण मंत्री भी है और मिडिया में इनकी गहरी पैठ है,फिर भी मिडिया में आपकी सरकार की लगातार कड़ी आलोचना से क्या जेटली पर आपको शक नही होता?????
कुछ दिन पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र के विरुद्ध मिडिया में फर्जी खबरे चलवाने का शक भी इसी पर है,और हाल ही में जनरल वी के सिंह के विरुद्ध मिडिया में जमकर दुष्प्रचार हुआ,इसमें भी इसी विभीषण का हाथ है,
मोदी जी आप से अनुरोध है कि इसके पहले कि आपकी सरकार की छवि धुल में मिल जाए,इस आस्तीन के सांप को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए.…।
महोदय आप से अनुरोध है कि इन बिंदुओं पर गम्भीरता से विचारकर उचित निर्णय लें और बीजेपी में राजपूतो को केंद्र और राज्य स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व दें।
अन्यथा मजबूर होकर राजपूत समाज भी अपना अलग रास्ता चुनने को विवश होगा जो आपके दल के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा।
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क्रमश::
शेष अगले भाग में----
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